दोस्तो आज हम बताने जा रहे है Navratri ki kahani । आपको यह navratri special Story पठ के अच्छा लगेगा। 


Navratri ki kahani

एक छोटे से गाँव मे कुछ लोग रहते थे। सभी लोग सब्जिया या फल बेच के अपना जीवन गुजारते थे। उस मेसे एक चंपा बाई थी वो अकेली रहती थी। वो अपने जीवन जिने के लिये फल बेचा करती थी। 
एक दिन सभी लोग एक्थे हुवे थे और आपास मे बात कर रहे थे। तब चंपा बाई उन लोगो को देखते हुवे पास गई और सभी को पूछा क्या हुवा आज सब्जिया बेचने नही जाना है। तब एक ने कहा हमारी बस्ती सरकार ने ठाकुर को बेच दिया है और हमे बस्ती खाली करने को कहा है। 

चांपा बाई ने सभी को कहा हम सभ सरकार के पास जाते है। और बात करते है हम इस जमीन पे सालों से रह रहे है ऐसे कैसे हम छोड़ दे। चलो सभी हम सरकार से बात करते है सभी सरकार के अधिकारी से बात करते है। लेकिन अधिकारी ने कहा सरकार ने ये जमीन ठाकुर को बेच दिया है। आप लोग यही से चले जाव नही तो हमे पोलिस को बुला ना होगा।

सभी लोग अब चंपा बाई से साथ ठाकुर के घर गये लेकिन ठाकुर ने भी मना कर दिया मैने ये जमीन बडी बडी बिल्डिंग बनवाने के लिये  खरीदा है। आप लोग यही से चले जाव और बस्ती खाली करदो। 


अब सभी लोग धीरे धीरे करके बस्ती खाली करने लगे। कोई जंगल मे रहने के लिये चला गया तो कोई फुट पाट पे। अब चंपा बाई अपना जीवन गुजर रही थी जब फल बेच के आ रही थी तब चंपा बाई को आवाज सुनाई दिया मेरी कोई मदद करो मुझे खाना खिलाव। 

चंपा बाई ने देखा तो एक बुड़ी औरत थी वो कही दिनों से खाना नही खाया था। उस का चेहरा मुर्जाया हुवा था। तब चंपा बाई ने फल की टोकरी नीचे रख के कहा आप ये फल खा लीजिये। वो बुड़ी औरत सारे फल खा लिये। चंपा बाई ने पानी की बोटल से पानी निकाला। और बुड़ी औरत को पानी दिया। 
बूड़ी औरत ने चंपा बाई को दुर्गा माँ की मूर्ती दिया और कहा आप दिन रात इस दुर्गा माँ की सेवा करना कल से नवरात्री शुरु हो रहा है। अब चंपा बाई मूर्ति लेके अपने घर चली गई। घर जाके मूर्ति की स्थापना के लिये घर की साफ सफाई करने लगी। और गाँव वालो ने चंपा बाई की मदद किया। 

अपने घर मे अच्छी तरहा से दुर्गा माँ कि स्थापना करके सेवा करने लगी। देखते ही देखते 8 दिन निकल गये थे। अब वो ठाकुर बस्ती खाली करवाने के लिये आने वाला था। और माँ दुर्गा का आखरी दिन कल था। 
ठाकुर बस्ती मे आके सभी लोगो को देख रहा था कुछ लोगो ने बस्ती खाली कर दिया था तो कुछ लोगो ने अभी तक खाली नही किया था। तब चंपा बाई आई ठाकुर ने कहा मेने तुम्हे कहा थाना मे आवुगा। आपने अभी तुरत बस्ती खाली नही किया तो मे सारी बस्ती तुड़वा दूंगा। 
चंपा बाई ने बस्ती बचाने के लिये कही कोशिश किया। 2 दीन रुक जाव नवरात्री चल रही है। लेकिन ठाकुर ने चंपा बाई की कोई बात नही मानी। चंपा बाई रोते हुवे अपने घर मे चली गई। ठाकुर से अब रहा नही गया अपने मजदूर से कहा GCB से घर तोड़ दो। लेकिन घर तोड़ ने की बजाय GCB टूट गई। 



अब ठाकुर को लगा ये औरत चुडेल लगती है मुझे घर मे जाके देखना होगा। ठाकुर घर मे जाके देखता है। तो चंपा बाई माँ दुर्गा के सामने बैठे के आराधना कर रही थी। ठाकुर ने अपने पैरोसे चंपा बाई को मार ने की कोशिश किया। 
तब तुरंत ही दुर्गा माँ पसंन् हुवे और ठाकुर को कहा मेरे भक्त तुम मार ने की कोशिश कर रहे है। ठाकुर माँ दुर्गा को देखके पैरो मे गिर जाता है। दुर्गा माँ ने ठाकुर को अच्छी तरहा से समझा या। 
अब ठाकुर सभी बस्ती वालो को पक्के घर बना के देता है और चंपा बाई की मुत्यु के बाद उस जगह पे माँ दुर्गा की स्थापना कर देते है। 

Navratri special story

एक गरीब परिवार से माँ और एक बेटी थी। उन दोनो को गाँव मे कोई पसंद नही करता था। उन लोगो के पास रहने के लिये घर नही था पहन ने के लिये कपड़े नही थे। खाने के लिये अनाज नही था। 
नवरात्री शुरू हो गई थी माँ और बेटी मंदिर मे पूजा करने का समान लेके गई। लेकिन मंदिर के पुजारी ने पूजा करने से मना कर दिया। पुजारी कहता है तुम्हे इस मंदिर मे आने का कोई अधिकार नही है। तुम लोग गरीब हो। तुम इस मंदिर मे आके अपवित्र कर देगे। बेटी मौका देखते हुवे मंदिर मे चली गई और फूल रखके के आ गई। 

माँ और बेटी रोते रोते घर चले गये। कुच दिन ऐसे ही निकल गये। पुजारी दूसरे दीन मंदिर मे आके देखता है की सभी फूल मुर्जाये हुवे है और ये एक फूल है जो अभी तक नही मुर्जया है। ये बात पूरे गाँव मे पता चल गई। सभी आपस मे कहने लगे ये तो मेने रखा था। खुद ने रखने का दवा करने लगे। 

अब माँ ने नवरात्रि के आखरी दिनों मे पूरी और शाक बनाया। अब माँ और बेटी खाने वाले थे उसी वक़्त एक आवाज आई मुझे जोर से भूख लगी है मुझे खाना दो। तब माँ ने उस बूड़ी औरत को खाना दिया। बूड़ी औरत ने एक बोरी दिया। और कहा ये विजया दशमी के दिन खोलना। 



अब माँ और बेटी नवरात्री के आखरी दिन फिर से मंदिर जाते है। लेकिन मंदिर के पुजारी ने धक्का देके बाहर निकाल दिया तब पूजा की थाली मेसे एक फूल नीचे गिर गया। 
दूसरे दिन पुजारी मंदिर मे आता है तब देखता है ये फूल अभी तक ताजा है। सभी गाँव वाले ये फूल देख रहे होते है। पुजारी ने कहा ये औरत डायन होगी कोई मंत्र किया होगा। तभी तो ये फूल अभी भी खिला हुवा है। 

गाँव वाले अब उस औरत को बुलाके लाये। गाँव वाले सभी लोग उस औरत को मारने लगे। तब वाहपे दुर्गा माँ पसंन हुवे और सभी को कहा किसने मेरे भक्त को मरा है। मे सभी को सजा दूँगी। इन लोगो ने मेरी सच्चे मन से सेवा किया है। मेंने 56 भोग छोड़ के स्वादीस पूरी और शाक खाया है। 
तब उस औरत ने कहा माँ छोड़ दीजिये इन लोगो को। येभी हमारे जैसे इंसान ही है। दुर्गा माँ ने कहा ये मंदीर सभी के लिये है। इस मे अमीर गरीब का कोई भेदभाव नही होगा। अब सभी लोग मंदीर मे आने लगे। माँ और बेटी उस बोरी को खोल के देखा तो उस मे बहुत सारे पैसे थे। 
माँ और बेटी अब खुशी खुशी रहने लगे। 

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