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 Motivational story of legends in Hindi


गाँव मे माँ अकेली रहती थी सभी अनाथ बच्चे को सिखा ती थी समझा ती थी और उन लोगो को खाना खिलाती थी। कही सारे दिन निकल गये। लेकिन माँ अपने पति और बेटी की रह देख रही थी। 

पति आर्मी मे एक टीम का कप्तान था। और बेटा अभी अभी लगा था इस लिये ट्रेनिंग ले रहा था। एक दिन एक बच्चे ने माँ से पूछा माँ ये तस्वीर मे कौन है तब माँ ने कहा ये कर्नल महेश है जो मेरे बेटे के दादाजी थे। उन्होने ने आर्मी के एक मिशन मे 15 अटकवादी को मार गीरा या था। और हमारी सरकार ने बहादुरी से  काम करने के लिये ये बड़े बड़े मेडल दीये थे। 

इस के बाद उन्होंने कही लडाई लड़ी उसमे विजय हुवे। कुच समय के बाद वो रिटाइड हो गये। वो हमेशा अपने पोते को कहते रहते है जो सुख यहा नही मिलता वो सुख हमे बोर्डर पे मिलता है। बेटे ने दादाजी को कहा पिताजी अब बॉर्डर पे खड़े होगे। दादाजी ने बेटे से कहा जी बॉर्डर पे खड़े होके तुम्हे देख रहे होगे। 



बेटे ने कहा मुझे भी पिताजी के पास जाना है। दादाजी ने कहा जरूर तुम्ह जावॉगे लेकिन अभी के समय आप पठाई करलो। अच्छे नम्बर से तुम्ह पास होते है तब तुम्हे जाने को मिलेगा। 

कुच समय के बाद दादाजी की मत्यु हो जाती है। और मेरे पाती फिर से मिशन पे चले जाते है। कही साल गुजर जाने के बाद मेरे बेटे का आर्मी मे जाने को मिला। उन दोनो को गये हुवे कही दिन निकल गये है। आज मे बहुत खुश हु। 

एक बच्चे ने माँ से पूछा अपका बेटा कब आएगा। माँ ने सभी को कहा एक दिन जरूर आएगा आप लोग अच्छे नुमबर से पास होते है तो। 

कुच समय के बाद एक दिन सुबह के समय मे बेटा पिता को हाथ मे लिये बहार खड़ा था। माँ घर का दरवाजा खोलती है वो अपने बेटे को इस हालत मे देखते हुवे रोने लगती है। लेकिन माँ खुद को संभाल लेती है। 

अंदर से माँ टुट गई थी लेकिन किसी को मेहसुस होने नही दिया। और दूसरे को भी संभाल ने लगी। जैसे तैसे कुच समय निकल गया। एक दिन माँ अपने बेटे से कहती है बेटा तुम्हे अब आर्मी मे जाना चाहिये। 


बेटा आर्मी मे चला जाता है। लेकिन कुच समय के बाद बेटा भी आर्मी के लिये शाहिद हो जाता है। माँ अपने परिवार मेसे तीनो लोगो को अपने देश के लिये बलिदान देते हुवे दिखती है। माँ अपने आप पे बहुत ख़ुश नसीब मानती है। 

माँ सभी बच्चे को अच्छी शिक्षा देती है। और सभी को आगे बड़ने के लिये प्रेरित करती है। 


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