Moral stories for kids

 

एक दिन की बात है दो दोस्त घर के सामने खेल रहे थे। खेल खेल मे बहुत समय हो गया था। राम की माँ ने राम को खाने के लिए आवाज लगती है। राम ने अपने दोस्त को कहा तुम्ह भी अपने घर खाना खा के आव उसके बाद हम फिर से खेलते है। 

रामु राम से कहता है क्या पता मेरे घर खाना बना है या नही। मेरी माँ दो दिनो से बीमार है। हमने कल साम भी खाना नही खाया था। राम ने अपने दोस्त की यह बात सुनके रामु को अपने घर ले जाता है। 

राम ने अपनी माँ को रामु की परेशानी बताता है। माँ ने राम को कहा बेटा अपने दोस्त की तुम्हे मदद कारनी चाहीये। राम ने अपनी माँ को कहा अभी तो मे बहुत छोता हु। माँ ने राम से कहा बेटा तुम्ह दोनो अभी खाना खालो बाद मे तुम्हे मे सारी बात कहती हु। 

रामु और राम दोनो दोस्त खाना खाने लागते है। खाना खाने के बाद राम कि माँ ने एक डब्बे मे खाना भर दिया और राम को कहा। अपने दोस्त के साथ घर जाव और जाते समय रास्ते मे से दवाई लेके जान। 



दोनो दोस्त अब चलते जाते है। राम आगे चलता है और रामु पिछे चलता है। तब राम ने अपने दोस्त को कहा चलो चलो। क्यु धीमे धीमे चल रहे हो। क्या सोच रहे हो तब रामु ने अपने दोस्त को कहा तुम्ह मेरे साथ पहली बार मेरे घर आ रहे हो। लेकिन मेरे घर मे तुम्हे खिलाने के लिये कुच नही है। 

राम ने कहा अरे मेरे दोस्त ये खाना और ये दवाई तुम्हारी माँ के लिये है। मुझे कुच नही खाना है। रामु ने कहा लेकिन मेरे घर मे तुम्हे बिठा ने के लिये चेयर नही है। राम ने कहा मेरे दोस्त मेरी चिंता मत करो।

दोनो घर पाहुच जाते है रामु ने अपनी माँ को खाना दिया और खाना खा ने बाद माँ को दवा पिलाई। राम ने कहा मेरी माँ ने कहा है आप अच्छी तरहा से ठीक हो जाव और हर दिन मे खाना आपके लिये लाया करुगा। 

रामु की माँ देखते हि देखते कुछ हि समय मे ठीक हो गई। रामु कि माँ रामु के साथ राम के घर आयी और राम की माँ को धनियवाद किया। राम की माँ ने कहा ये दोनो दोस्त की कहानी है हम बडे साथ नहीं देगे तो कम जोर हो जाएगी। इस लिये हमे भी इस दोस्ती का हिस्सा बनना है। 

Moral: सच्चे दोस्त यही होते है जो मुशिबत के साथ काम आये। 

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