Short story of a lazy boy in Hindi || The lazy Boy 

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दोस्तो आज आपको यह बताने वाले है hindi short stories for class 1 lazy boy के बारे मे हमे यकिन है Short story of a lazy boy in Hindi बहुत पसंद आयेगा | short stories in hindi


the lazy boy short moral story in hindi

 

एक शेठ का बेटा था उसका नाम रगु था अकसर वो देर से उथाता था । वो स्कूल मे लेट पोहुचता था वो खाने मे आलस करता था । जब भी शेठ अपनी दुकान मे जाता था तब रगु को साथ ले जाने के लीये हर दीन उसे उथाता था लेकीन रगु बस 5 मिनिट सोने दो इस तरीके से वो उथता ही नही था ।

दीन भ दीन रगु खाने की चिजि मे आलस करने मे लग जाता था । राजु को घर के बना खाना नही खाना होता है उसे बहार का अच्छे अच्छे पकवान खाने होते है पापा के पास पैसे ज्यादा लेता है और फिजुर के खर्चे करता रहता है । शेठ रगु को बहुत समजाता है उसे सही मार्ग दिखाता है लेकीन रगु बचपना ही करता है ।

शेठ बहुत बिमार होने के कारण शेठ की मुत्यु हो जाती है । लेकीन रगु अभी भी आलस करता है घर मे खाने पीने की चिज नही होती है और दुकान मे अब सभी सामान कम होने लगे थे पैसे की आदनी आनी बंध हो जाती है । मां ने रगु को कहा बेटा कुच करो नही तो हम रास्ते पे आ जायेगे । रगु ने मां से कहा मां मुझे कुच नही आता है दुकान मे कैसे सामान बेचते ये सब कुच नही पता है ।




मां ने रगु को कहा पास के गांव मे तेरे चाचा रहते है उस के पास जाव तुम्हे अच्छी तरहा सिखायेगे के किस तरहा दुकान मे सामान बेचा जाये । अगली सुबह रगु चाचा के घर जाने के लीये निकल पडा । रगु घर जाके चाचा से मिलता है और रगु ने सारी परेशानी की बात कही । चाचु ने कहा तुम्हे केवल यह करना है हर दीन दुकान पे जाके बेथना है और जब साम होने को आये तब पुरी सामान की लिस्ट देखना है । ये सब तुम्हे कुच दीन तक करना है ।

रगु दुसरे दीन चाचा की बात सुन्के सुबह मे दुकान चला जाता है और साम के समय सामान की लिस्ट देखा करता है । हर दीन रगु येसा करता है कुच मजदूर बात कर रहे थे मालीक हर दीन दुकान आते है और सामान चेक करते है हमे अब ग़ोटाला नही करना चाहीये क्यु की हम कभी भी मालिक के हाथ पकडे जा सकते है ।

रगु हर दीन दुकान जाने की वजह से सभी मजदूर चोक्कने हो गये थे और सभि अच्छी तरहा से काम करने लगे । देखते ही देखते कुच दीन मे रगु फिर से पैसे वाला बन गया जो गुमाया था वो फिर से कमा लीया । मां ने कहा अब से तुम्ही ये दुकान सभाला करोगे । अब तुम्ह चाचा को ध्यनीयाव कहके आवो ।

रगु चाचा के घर जाता है और चाचा को कहता है आपने मुझे जिस तरिके कहा था और करने को इसी तरहा मैने कीया आज फिर से पहले जैसी दुकान चलने लगी है । चाचा आपका बहुत ध्यनीयावाद ॥ चाचा ने कहा कुच लोग गोटला कर रहे थे तुमहारे हर दीन दुकान जाने के कारण सबी मजदूर गोटाला करने का नही सोचेगे । जो ग़ोटाला करते है वो बंध कर देंगे सबी मजदूर मेहनत करेगे । 

moral stories : एक अच्छी सिख जिवन मे काफी सारे बादलाव करती है । इस लीये हमे आलस नही करना है ।   


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एक लडका था वो अपनी मां के साथ रहता था । वो होशीयार था लेकीन आलसी भी था । थेर से उथना समयसर स्कूल ना जाना । मां भी राजु को कुच नही कहती थी पिता की मुत्यु के बाड मां बाहार जाके काम कीया करती है । मां बडे प्यार से राजु को स्कूल जाने के लीये तैयार करती है राजु स्कूल मे भी सो जानाता है । पठाई मे अच्छे नंबर नही आते है ।

टीचर ने एक दीन राजु की मां को स्कूल बुलाया और मां को राजु के बारे मे पुरी जानकारी दीया । मां ने कहा मे बाहार काम करने के लीये जाती हु इस लीये ज्यादा समय राजु पे नही दे पाती हु । अब से हर दीन राजु पे ध्यान दीया करुगी । लेकीन मां की कही बात का राजु पालान नही करता है अपनी हि मन मानी करता रहता है ।

एक दीन राजु गहरी निंद मे था वो सपना देख रहा था । एक नयी दुनीया मे था उस जगह पे सब कुच था केक था चोकलेट था कही अलग अलग प्रकार के पकवान थे । राजु ने सोच लीया मे अब इस दुनीया से कभी नही जावुगा अब मे यही पे रहुगा और केक और चोकलेट खावुगा । राजु केक खाने के लीये जाता है तब केक गायब हो जाती है । राजु कुच भी छुता है वो चिज गायब हो जाती है ।

राजु परेशान होने के कारण आगे चलता गया वहा एक सघु बाबा बेथा हुवा था उससे राजु मिलता हे बाबा ने कहा तुम्हे केक खानी है तो तुम्हे मेहनत करना होगा तभी तुम्ह इस जगह से केक खा पावोगो । राजु ने कहा मुझ से मेहनत नही होगी । बाबा ने कहा ठीक है तो तुम्ह आगे की और जाव वहा पे बिना मेहनत कीये खाना मिल जायेगा ।




राजु दुसरी दुनीया मे गया और वाहा जाके बहुत सारा खाना खाया केक ,चोकलेट । राजु ने बहुत ज्यादा खा लेने कारण अब उसे निंद आने लगी थी इस कीये वो सोना चाहता था । तब बाबा आता है बाबा ने कहा तुम्हे इस जगह पे सोने नही दीया जायेगा । यहा पे खाने के बाद सभि लोग खुशि खुशि रहते है । इस लीये तुम्हे सोने नही दिया जायेगा ।

राजु रोते रोते आगे चलता गया वहापे राजु को एक परी मिली । रजु ने परी से बात कीया मुझे घर जाना है इस जगहा पे नही रहना है । परी ने कहा तुम्हे इस जगह पे रहके सिख लीया है ना की किसी भि चिज को करने के लीये हमे काम करना पडता है । काम करे बिना हमे चेन से निंद भी नही मिलती है ।

राजु ने परी से कहा मे सब कुच समज गया हु अब मे बहुत मेहनत करुगा । राजु अब जल्द से जल्द उथ जाता है । राजु स्कूल मे अच्छे अच्छे नंबर लाता है । राजु का एक सपना उस के उदंर बहुत सारा परिवर्तन लाके गया । मां ने राजु को देखा राजु अब बहुत बदल गया है । राजु अब समयसर उथ जाता है और समयसर स्कूल मे जाता है ।

moral stories : हमे अपने आदंर के आलस से छुटकारा पाना है और मेहनत करके आगे बडना है ।      


दोस्तो मुजे यकिन है कि Lazy boy hindi kahaniya moral story आप को पसंद आयि होगि । यह Lazy boy moral story आपको कोइ भुल करने योगियाता लग्ता है तो हमे कोम्मेंट करके बाताये और आपको कहनिया New inspirational story of a lazy boy लिखने का पसंद हो तो Hindi story for kids lazy boy या the lazy boy short moral story in hindi ईमैल कर सकते हो | Hindi short story for class 2


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