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यदि मै समाचार पत्र होता लघुकथा || yadi me samachar patra hota || hindustan live   

दोस्तो आज आपको यह बताने वाले है yadi main samachar patra hota के बारे मे हमे यकिन है यदि मैं समाचार पत्र होता पर लघु कथा बहुत पसंद आयेगा newspaper history

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समाचार पत्र संचार का प्रमुख साधन है । जिस तरह पत्र से हमे दोस्तो और सगे-सबंधितो का समाचार प्राप्त होता है उसी प्रकार समाचार पत्र से हमे देश-विदेश का समाचार घर बैठे मिल जाता है । आधुनिक युग मे समाचार पत्र हमारें जिवन का आवश्यक अंग बन गया है । आज लोगों की दिनचर्या समाचार पत्र पठ ने से शुरु होती है । सुबह-सवेरे पठना आज लोगो की आदत बन गई है ।

प्रारंभ:- कुछ लोग समाचार पत्र का आरंभ चिन से- मानते है तो कुछ् लोग इटली को इसका जन्मस्थान मानते है । भारत मे इसका आरंभ अंग्रेजो ने 18वीं शताब्दी मे किया । आज भारत मे 1,173 तरह के समाचार पत्र छपते है । हींदी मे सर्वाधिक 400 प्राकार के समाचार पत्र छपते है ।       



प्रकार:- समाचार पत्र कई प्रकार के होते है । जो समाचार पत्र रोज छपते है उन्हे दैनिक समाचार पत्र कहा जाता है । इसी प्रकार सप्ताह मे एक बार छपने वाले समाचार पत्र को साप्ताहिक, पन्द्रह दीनो मे एक बार छपने वाले समाचार पत्र को पाक्षिक तथा महिने मे एक बार छपने वाले समाचार पत्र को मासिक कहा जाता है ।

उपयोगिता:- समाचार पत्र समाचार पत्र का एक शक्ति-शाली माध्याम है । समाचार पत्रो से हमे समाचार तो मिलता ही है , साथ ही साथ इससे हमे अनेक प्रकार ज्ञान भि प्राप्त होता है । व्यापारी को इससे देश भर के एक सामानो के भाव का पता-चलता है । व्यापारी समाचार पत्र मे विज्ञापान देकर अपने सामानो का प्राचार करते है । इसमे बछो के लिए छोटी-छोटी कहानीया,कवीताए तथा पहेलिया भी छपती है । समाचार पत्रो का एक पन्ना खेलो के विभिन्न समाचारो से भरा रहता है । नौकरी कि खोज करने वालो के लिए आखबार मे विज्ञापन छपता है । इस तरह समाचार पत्र एक ओर हमारे ज्ञान का विस्तार करता है तो दुसरी तरफ देश-विदेश कि घटनाओ की खबरए हम तक पहुचाता है ।



उपसंहार:- समाचार पत्र के मह्त्वपूर्ण होने से इनके सम्पादको का दायित्व भी बठ जाता है । सम्पादको को सच्चे समाचारो को ही छापना चाहिए । इसी तरह स्वास्थ्य को हानि पहुचाने वाली चिजो का अखबार मे प्राकार नही करना चाहिए । भ्रष्ट और उतेजक चित्रो को भी अखबार मे छपने से परहेज करना चाहिए।

 

'यदद मैं समाचार-पत्र होता'- दवर्य पर लगभग 100-120 शब्दों मेंएक लघकु था दलदखए|    

 यदि मैं समाचार पत्र होता लघुकथा



दोस्तो मुजे यकिन है कि yadi mein samachar patra hota आप को पसंदआयि होगि । यह history of times of india आपको कोइ भुल करने योगियाता लग्ता है तो हमे कोम्मेंट करके बाताये और आपको कहनिया yadi mein samachar patra hota laghu katha   लिखने खा पसंद हो तो yadi main samachar patra hota laghu katha या newspaper tomorrow ईमैल कर सकते हो  | historic news


 

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