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Short story Bedtime ॥ Moral stories

दोस्तो अज अपको यह बताने वाले है Bedtime story kids के बरे मे हमे यकिन है | Short story ideas बहुत पसंद अयेगा । Moral stories

short story

                                                                                 

खरगोश कि कहानी  Short story for kids

राम ओर श्याम दोनो पक्के दोस्त थे एक दिन वो दोनो चलते चलते जंगल मे पोहुच गये । वो दोनो को समय का पता नहि चाला साम होने को आया । तब दोनो को एक खरगोश का बच्चा दिखाइ दिया । वो दोनो को देख के वो खरगोश का बच्चा पेड के पिछे छुप ने लगा । राम ने उस बच्चे को कहा की तुम्ह दरो मत हम तुम्हे कुच्छ नहि करे गे हमारे पास आ जाव । वो बच्चा दरते हुवे राम के पास आया श्याम को लगा कि ए बच्चा कुछ तखलिफ मे हे ।

राम ने उस बच्चे को निचे उतारा वो तुरत हि दोद्ते हुवे उस्कि मा के पास चाला गाया । राम और श्याम वो दोनो भि उस बच्चे के पिछे पिछे चले गये । तब वो दोनो ने देखा उस बच्चे के मा एक पिंजरा बंध हे । श्याम ने राम से कहा कि वो बच्चा हमे इशारे से कह रहा हे की मेरि मा को पिंजरे से बहार निकालो । राम को श्याम कि बात सहि लहि तुरत हि राम ने पिंजरा खोल दिया और वो खरगोश आजद हो गाया ।

खरगोश का बच्चा जेसि हि पिजरा खुला वो तुरत हि अपनि मा को गले लग गया । उस के बाद खरगोश ने राम और श्याम को ध्यानिया वाद किया । वो बच्चा राम के हाथ पकड ने लगा और इशारे करने लगा कि मेरे एसे कहि भई और बहेन हे जिसे पिंजरे मे केद किया गया हे । वो दोनो आगे कि और गये तो बहुत सारे पिंजरे रखे हुवे थे ।

वो दोनो ने उस पिंजरो को खोला ओर सभि सारे खर्गोश को बहार निकाला सभि लोग एक दुसरे से मिल ने लगे । तब श्याम ने सोचा कि क्यु नहि हम ए सारे खरगोश  के बच्चे को अपने साथ ले चलते हे । सभि को रहने के लिए एक घर देते हे ओर कुच खाने के लिये ।

वो दोनो ने साभि खरगोश को अपने साथ ले लिया अपने घर के बगिचे मे रहने के किये छोटा सा एक घर बनाया वो सभी खुसी-खुसी रहने लगे ।


मछलि और चकलि कि दोस्ती Famous bedtime stories

 

एक तालाब के किनारे एक चकली हर रोज पानि पिने के लिया आया करती थी । कुच दाने खाने के बाद वो पानि पिया करती थि ओर वो पानि पिके वो पेड पे चली जति थि । हर दिन एक मछ्ली उस चकली को देखती उस के मन मे एक सवाल था कि बहार का खाना खाने के बाद पानी पिना जरुरी हे ।

कुच दिन बाद वो मछली उस चकली का इंतेजार कर रहि थि । साम होने को आया वो चकली वहा तलाब मे पानी पिने के लिये आयी । वो चकली पानि पि रहि थि वो मछली वहा पे आई ओर चकली को कहा कि बहार का खाना बहुत अच्छा है जो अपको पानि पिने के लिये तालाब के पास आना पदता हे ।   

चकली बोलि जि हा बहार का खाना एक दम भारि खाना है इस लिये खाने के बाद पानि पिना जरुरि है । मछली कहने लगि कि मुजे भि एक दिन खाना खिलावो मुजे भि पता चले कि कितना भारी खाना है । चकली बोलि जि हा लेकिन मेरि भि एक शरत है मुजे इस तालब का कुछ खाने के लिये मिलेगा तो मे तुम्हे जरुर खिलावु गी ।

मछली ने कहा कि जरूर कल मे तुम्हारे लिये तालाब मे से कुच्छ खाने के लिये लेके आवु गि चकलि ने कहा मे भि अपके लिये कुच बहार से लेके अवुगी । दुसरे दिन वो दोनो कुच ना कुच लेके आते है एक दुसरे के लिये ।

अपास मे वो दोनो एक दुसरे को खाना देते हे ओर बहुत सारी बात करते हे । वो दोनो पक्के दोस्त बन जाते हे । हर दिन चकली बहार से कुचना कुच खाने के लिये कुच ना कुच लेके आती है । हर साम वो दोनो मिल जुल कर खाना खाते हे ओर बात किया करते है ।

 

चतुर शियाण और बगुला Short story kids

 

ए कहानी हे एक बगुला और एक चतुर शियाण कि । बगुला गमंदी था किसी कि बात नहि सुनता था ओर अभिमानि था वो बगुला सभि लोगो को परेशान करता था वो तालाब मेसे कुच मछलि पकद के ले जाता था ओर जो कोइ रास्ते मे मिल जाता है उस सभि के पाछ मछलि कि हद्दी फेका करता था ।  वो बगुला रास्ते मे जो कोइ मिल जता है उसि के साथ वो उस कि खिल्ली उदा ने लगता है ।  एक दीन चतुर शियाण वो तालाब कि और तहलने के लिये निकल पदता है ।  रस्ते मे जो कोइ मिलता है वो केवल उस बगुले के बारे कह रहा हे जेसे जेसे वो शियाण आगे बद्ता गया उसे बगुले के बारे मे सभि बात पता चल गई ।

वो थोदि हि आगे कि और गया तो उसे वो बगुला दिखाइ दे रहा था वो कुच मछली से बात चीत कर रहा था । वो देखते हुवे शियाण उस बगुले के पास गया ओर कहा शियाण ने क्या चल रहा हे बगुला भाई । वो बगुला भाई सुंन्के बगुले मे बहुत जोश आ गाया वो शियाण को भला बुरा कहने लगा । 

चतुर शियाण ने बगुले को कहा कि तुम्ह हर रोज ए मसुम सी मछली पकद के खाना खाते हो ओर दुसरे पे हद्दी फेक ते हो तुम्हे क्या मिलता होगा । तुम ने कभि केक्देका माश खाया हे उस का माश बहुत अच्छा होता है । वो सुनके वो बगुले ने केक्देको पकद ने का थान लिया ।

वो पानी मे देखने लगा लेकिन उसे केक्दा दिखाइ नहि दे रहा था शियाण उस पे हसने लगता है वो बगुला बहुत टेनशन मे आ गाया था । वो गहरे पानि मे गाया उसे एक बहुद बादा केक्दा दिखाइ दिया बगुला ने तुरत हि उस केक्दे को पकदने के लिए उस कि चाच पानि मे दाली बगुले ने चाच मे केक्दे को पकद के पानि से बहार निकाला ।

वो बगुला शियाण के पास आया ओर कहने लगा कि ए देखो मेंने पकद लिया उस केक्दे को । सभि लोग देख ने लगे उस बगुले को बगुले को पता नहि था कि केक्दे ने उस बगुले कि गरदन को पकद लिया है । तब चतुर शियाण ने बगुले को कहा कि आज सभि लोग तुमहारा मोत का तमासा देखे गे । बगुले ने उस केक्दे को छोदा ने के लिये बहुत प्रयास किया  लेकिन वो केक्दे को छोदा नहि पया । सभि के पास गाया मदद मग ने के लिये लेकिन कीसि ने उस बगुले कि मदद नहि किया ।

थोदि देर के बाद वो बगुला मर गया ओर केक्दा वपास पानि मे चाला गाय । चतुर शियाण ओर सभि चले गये । पानि का बहाव आया ओर बगुला पानि के बहाव के साथ चला गाया ।


दो बकरी Ideas for Short story

 

एक चरवाहा एक दिन दो बकरी साथ जंगल मे गया दो बकरी बहुत शरारती थी वो चरहवा एक पेड कि छाया मे आराम करने के लिये बेथा । उतनि हि देर मे दोनो बकरी तालाब पास चली गई । वो दोनो ने तय किया कि वो तालाव के किनारे कोन पहले पहोचता है। एक बकरी पानी मे चलि गई ओर दुसरी बकरी पुलसे जा रहि थि ।

वो बकरी पानी की गहराइ मे चली गाई वो पानि मे फस गई दुसरी बकरी पुल पे जा रहि थी दुसरे कोने पे शेर बेथा था । चरवाहा दोनो बकरी कि तलास मे निकल पदा । उस ने देखा एक बकरी पानि मे फसी है दुसरी बकरी पुल पे फसी है । चरवाहा टेनशन मे आ गाया है मे पहले किस को बचाव इस सोच मे पद गाया । वो चरवाहा पानि मे चला गाया ओर उस बकरि को बहार निकाल ने कि बहुत कोशिश किया लेकिन वो बहार निकाल नहि पाया । वो बकरी पानि का बहाव ज्यादा था इस लिये वो पानि मे बह गई ।

वो चरवाहा दोद ते हुवे पुल के पास गाया लेकिन शेर उस बकरी के पास आते देख ते हुवे चरवाहा दर गाया ओर छुप गया वो बकरी को इशारे से अपने पास बोलाया राहा था लेकिन वो आ नहि रहि थी शेर उस बकरी के पास आया ओर बकरी को मार दिया । वो चरवाहा अपना जिवन बचाके बहुत भागा । घर जाके बहुत रोने लगा वो चरवाहा ।

चरवाहा ने अपने जिवन चला ने के लिये फिर एक बकरी को ले आया । हर दिन वो बकरी की देख भाल करता रहा । बकरी को केवल अपने घर के अगन मे हि रखता था वो खुद जाके खाना ले आता था ओर उस बकरी को खाना खिलाता था ।

कौवे - चकलि कि जंग Short bedtime story

 

एक हराभारा सा जंगल था उस मे सभि जिवजन्तु पशु-पक्षी रहा करते थे । पशु-पक्षी ने जंगल मे दावात रखी उस मे खाना पिना नचना सब कुच्छ था । उस मे पोपट ओर कौवे के बिच मे कहा सुनी हो गई पोपट कहता है कि मे सबसे अच्छा बोलता हु मेरि आवाज बहुत सुंदर है कौवा कहता है कि मे सबसे अच्छा बोलता हु  धिरे धिरे करके बात चित जंग मे बदल गई ।

सभि पशु-पक्षी मिल के वो दोनो को अलग किया ओर कहा कि तुम्हारे बिच मे एक कविता स्पार्धा का आयोजन करते हे । जो सबसे अच्छी कविता सुनाते हे उसि को विजेता गोसित करे गे ।  

वो दोनो कविता स्पार्धा कि पेक्टीश करने लगे । वो पोपट सभि लोगो को कहने लगा की  मेहि इस बार जितु गा । कौवा कहने लगा कि मेहि जितु गा । उन दोनो मे बहुत जित ने का उत्साह था । लेकिन सब को पता था कि पोपट हि जिते गा ।

दुसरे दिन सभि लोग एक्थे हुवे सभि लोग पोपट ओर कौवे कि कविता सुनेके के लिये आ गये । पोपट ने पहेले शुरुआत किया सभि लोग पोपट कि कविता सुनके वाह वाह करने लगे इस के बाद कौवे का नमबार आया ओर वो जोर जोर से कविता बोल ने लागा सभि लोग कौवे कि आवाज सुनके अपना कान बंध करने लगे । कविता पुरी होने के बाद सभि लोग ने वो आपस मे बात चित करके अखिरकार निणय लिया कि कोन विजयता है ।   

जंगल के मुखिया ने कहा कि हमे पोपट कि आवाज बहुत आच्छि  लगी इस लिये हम लोगो ने पोपट को विजय गोसित करते हे ।कौवे को कहा कि तुमने भि कविता अच्छी हि कहि है लेकिन सभी लोगो को पता है कि कविता सब्से अच्छी किसने कहि हे । तुम्हारा अवाज गहरा है इस लिये तुम्हे जित नहि दिया है ।

कौवे ने अखिर कार स्विकार कर लिया कि मेरा आवाज पोपट जेसा अच्छा नहि हे इस लिये मे हार गया हू । व दोनो ने अखिर मे एक दुसरे को गले मिले ओर जो कहा सुनि हुवी थी उसको समाथान किया ओर एक साथ मिल जुल के रहने लगे ।


बील्ली और चुहा Bedtime story for kids

 

एक शहेर मे एक छोटे से घर के अंदर एक बील्ली ओर चुहा रहते थे उस घर मे बील्ली सभि कि चहीती थी । लेकिन एक दिन उस घर मे चुहा बिल मेसे निकल आता है उस घर मे एक छोटी सी लदकी रहती थि उसने उस चुहे को देख लिया पकद ने के लिये उस के पिछे भाग ति है लेकिन वो चुहा दर जाता है ओर बिल के अंदर छुप जाता है ।

वो लदकि उस चुहे को बिल के अंदर से बाहार निकाल ने के लिये बहुत कोशिश करति है लेकिन उस चुहे को बहार निकाल नहि पाई । उस के पाप ने पुछा बेटा क्या कर रहि हो उस लदकि ने पापा से कहा कि मे बिल के अंदर छुपा हुवा चुहे को बाहार निकाल रहि हु लेकिन वो निकाल हि नहि रहा है ।

पापा ने कहा कि बेटा तुम एक काम करो उस के लिये के रोटी लेके आवो ओर उस बिल के पास रख दो वो तुरत हि आ गई रोटी खाने के लिये । उस लदकी ने पापा कि कहि बात सु कने उस रोटी को बिल पे रख दिया । वो चुहा थोदी देर के बाद वो रोटी खाने के लिए आता है ।

लेकिन वो बील्ली उसे हि देख रहि होती है इस लिये वो अगे कि और नहि आ पाता है वो दर के पिछे के और चाला जाता है । वो लदकि ने उस बिल्लि को एक कमरे मे केद कर देति है उस के बाद वो चुह तुरत है वो रोटी खाने के लिए आता है । उस लदकी ने कहा कि तुम मुज्से दोस्ती करो गे वो चुहा सिर हिल्ला के हा कहती है । हर रोज वो लदकी उस चुहे को खाना देती है ।

बील्ली को अच्छा नहि लगता था हर दीन वो चुहा उस के लिये बनि रोटी को वो चुहा खा लेता है इस लिये । एक दिन वो बील्लि ने सोचा कि इस चुहे कि वजाह से मेरे हिस्से कि रोटी चलि जाति है और मे भुखि रह जाती हु । इस लिये बिल्ली ने अपने साथी सभि बिल्ली बोलाया ओर उस चुहे को पकड ने के लिये ।

घर मे कोइ ना हो ने कि वजाह से बिल्ली ने चुहे के बिल के पास रोटी रख दिया । सभी बिल्ली अपने अपने जगह पे छुप गई । जेसे हि रोटी खाने के लिये वो चुहा आया तो सभि बिल्ली उस चुहे पे जपत पदी । चुहे ने कहा कि मे आज के बाद इस घर मे कभी नहि लोट के आवु गा मुजे जाने दो ।

सभि बील्ली ने उस चुहे कि बात को मान लिया और उसे छोद दिय । वो वहासे चला गया और वो कभी लोट के नहि आया । वो लदकि उस चुहे को बहुत खोज ने कोशिश किय लेकिन वो मिल नहि रहा था । वो फिर से उस बिल्लि के साथ खेल ने लगि । 

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डोस्तो मुजे यकिन है कि Good moral stories अप को पसंदअयि होगि । यह Bedtime stories अपको कोइ सुधार करने योगियाता लग्ता है तो हमे कोम्मेंत करके बाताये और अपको कहनिया short Stories लिखने खा पसंद हो तो हमे Bedtime story या Short story lines एमैल कर सक्ते हो |


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